अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों के विकास को सरकार सक्रिय, दिए ये निर्देश

उत्तराखंड सरकार भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों के विकास को सक्रिय हो गई है। सीएम ने त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीमांत गांवों के विकास पर ध्यान देने को कहा है।

देहरादून। नेपाल और चीन के साथ संबंधों में आई तल्खी के बाद राज्य सरकार भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों के विकास को सक्रिय हो गई है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्र सहायतित सीमांत क्षेत्र विकास योजना के साथ ही मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत सीमांत गांवों के विकास पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि सीमांत इलाकों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास से पलायन थामने में मदद मिलेगी। यह सुरक्षा की दृष्टि से भी जरूरी है। उन्होंने चीन सीमा से सटे क्षेत्रों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आइटीबीपी) की चौकियों में नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को आइटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल और आइटीबीपी और शासन के अधिकारियों संग विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस दरम्यान मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में निर्मित सीपीडब्ल्यूडी की सड़कों की मरम्मत बीआरओ से कराने और वहां मोबाइल टावर स्थापित करने को केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा। साथ ही देहरादून में आइटीबीपी को फ्रंटियर हेड क्वार्टर के लिए 15 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश डीएम देहरादून को दिए। मुख्यमंत्री ने आइटीबीपी के जोशीमठ परिसर की भूमि का स्वामित्व आइटीबीपी को देने के मद्देनजर प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के निर्देश सचिव राजस्व को दिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आवाजाही बढ़ाने और वहां से पलायन रोकने को प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। साहसिक पर्यटन गतिविधियों में आइटीबीपी की दक्षता के मद्देनजर उन्होंने पर्यटन और आइटीबीपी के अधिकारियों का वर्किंग ग्रुप बनाने और विंटर टूरिज्म सेल से समन्वय पर भी बल दिया। आइटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल ने देहरादून के आसपास फ्रंटियर हेडक्वार्टर के लिए भूमि मुहैया कराने, जोशीमठ का स्वामित्व प्रदान करने के साथ ही सीमांत 42 चौकियों को ग्रिड से बिजली आपूर्ति कराने, सीमांत गांवों में आवाजाही बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों द्वारा अपनी सीमा तक आवाजाही बढ़ाई गई है। लिहाजा, हमें भी अपने क्षेत्रों में केवल अपने देश के लोगों के लिए इनर लाइन परमिट की व्यवस्था करनी चाहिए।