कोरोना वायरस : कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में उत्तराखंड की पहली जीत, एक प्रशिक्षु आइएफएस अस्पताल से डिस्चार्ज

कोरोना के खिलाफ जंग में उत्तराखंड ने पहली जीत हासिल कर ली है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का एक प्रशिक्षु आइएफएस अब पूरी तरह स्वस्थ है।

देहरादून। कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में उत्तराखंड ने पहली जीत हासिल कर ली है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का एक प्रशिक्षु आइएफएस अब पूरी तरह स्वस्थ है। उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बता दें, प्रदेश में कोरोना के अब तक पांच मरीज सामने आए हैं। इनमें यह पहला मरीज है, जो ठीक हुआ है। उसकी लगातार दूसरी रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है। 

बता दें, गत 15 मार्च को दून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का एक प्रशिक्षु आइएफएस कोरोना संक्रमित पाया गया था। वह स्पेन से एक शैक्षिक टूर से लौटे 28 सदस्यीय दल का हिस्सा था। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दल में शामिल अन्य प्रशिक्षुओं के भी सैंपल लिए थे। 19 मार्च को दो और प्रशिक्षुओं की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिनमें अब एक पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। नासिक के रहने वाले इस प्रशिक्षु का कहना है कि कोरोना खतरनाक बीमारी है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इससे पार न पाया जा सके। कोरोना से लड़ने के लिए आपको मानसिक रूप से भी मजबूत होना पड़ेगा।

अगर आप मानसिक रूप से तैयार हैं तो समझिए आधी जंग आप जीत गए। बाकी कुशल डॉक्टरों को टीम आपको ठीक कर ही देगी। आइएफएस प्रशिक्षु ने दून अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ और रेडियोलॉजी विभाग का भी आभार जताया है। जिन्होंने खुद की जान की परवाह किए बगैर उनका उपचार किया। 
प्रशिक्षु ने बताया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें मामूली सा बुखार आया था, जो दो दिन में दूर भी हो गया। गले मे खराश भी नहीं हुई और कोई और लक्षण भी नहीं थे, लेकिन तीसरे दिन अचानक मेरा स्वाद और सूंघने की क्षमता खत्म हो गयी। नमकीन, मीठा कुछ भी पता नहीं चल रहा था। मैंने पढ़ा था बहुत रेयर मामलों में कोरोना में स्वाद और सूंघने की क्षमता खत्म हो जाती है। बहरहाल अब वह ठीक हैं और ऐसा लग रहा जैसे कोई जंग जीत ली है।

डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को एंटी मलेरियल ड्रग क्लोरोक्वीनीन की डोज दी गई। इसके अलावा अन्य दवाएं लक्षणों के आधार पर तय की गईं। उन्होंने बताया कि वायरस का असर मरीज के श्वसन तंत्र को प्रभावित नहीं कर पाया। जिस वजह से मरीज के फेफड़ों में कोई संक्रमण नहीं था। उसके ठीक होने से डॉक्टरों की टीम भी उत्साहित है।